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करबला से आएगा हज़रत अब्बास अस के रौज़े का परचम, हिंदुस्तान की मशहूर हस्तियां होंगी शब्बेदारी में मौजूद

करबला से आएगा हज़रत अब्बास अस के रौज़े का परचम, हिंदुस्तान की मशहूर हस्तियां होंगी शब्बेदारी में मौजूद

 



आज से तकरीबन 1400 साल पहले ईराक के करबला में मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन अस अपने 72 साथियों के साथ तीन दिन के भूखे प्यासे शहीद कर दिए जाते हैं.. उनको उस वक्त के ज़ालिम शासक यज़ीद की फौज ने शहीद किया था.. जिसमें इमाम हुसैन अस का 6 महीनें का बच्चा भी मोजूद था.. वहीं शहादत के बाद उनके परिवार की महिलाएं और बच्चों को कैद करके हज़ारों किलोमीटर चलाया गया और उनपर ज़ुल्म किया गया.. 

इसी को देखते हुए पुरी दुनिया में 10 मोहर्रम को आशूरे का दिन मनाया जाता है.. और मोहर्रम का ग़म 2 महीने 8 दिन तक शिया समुदाय के लोग मनाते हैं..


वहीं पिछले 48 साल से उत्तर प्रदेश के उतरौला, ज़िला बलरामपुर में स्थित बड़ा इमामबाज़ा आबिदा बेगम में स्वर्गीय इजिनियर सैय्यद आफताब हुसैन रिज़वी के ज़रिए पुरी रात शब्बेदारी की जाती है.. जिसमें सौग़वार मौलाना की मजलिस सुनते हैं. जिसमें करबला के शहीदों और उनके बेटे की शहादत का ज़िक्र होता है.. और उसके बाद नौहेख्वान नौहा पढ़ते हैं..

25 मोहर्रम को 48वां कदीमी शब्बेदारी और इमाम हुसैन अस के बेटे हज़रत ज़ैनूल आबादिन अस का शबीहे ताबूत निकाला जाएगा.. 25 मोहर्रम को ही बीमार ए करबला यानि शियाओं के चौथे इमाम सैय्यद ए सज्जाद अस जिन्हें जैंनूल आबादिन भी कहते हैं उनकी शहादत का रोज़ है.. इसलिए 13 अगस्त को रात 8.30 बजे से बड़ा इमामबाड़ा आबिदा बेगम, उतरौला ज़िला बलरामपुर में मजलिस शुरू की जाएगी..जिस मजलिस को मौलाना शब्बीर अली वारसी पढ़ेंगे, वहीं निज़ामत अनीस जायसी तो पेशख्वानी -शरफ उतरौलवी, अमन सुलतानपुरी, आलम सुलतानपुरी करेंगे.. जिसमें मुंबई से आए ज़हीर अब्बास नौहेख्वान होंगे.. वहीं अंजुमन सज्जादिया जलालपुर, अंजुमन दस्ता ए मासूमिया घोसी, अंजुमन ज़ीनतुल अज़ा अलीगढ़ सुलतानपुर, अंजुमन हुसैनिया अमिया देवरिया, अंजुमन अब्बासिया सुरौली सुल्तानपुर नौहेख्वानी और मातमदारी करेंगी.. 

आपको बता दें कि आफताब हुसैन रिज़वी के निधन के बाद से उनके बेटे अंतरर्राष्ट्रीय नौहेख्वान अमीर हसन आमिर जिन्हें दुनिया भर में सफीर ए अज़ा के नाम से भी जाना है, वो ही इस पूरी शब्बेदारी करवाते हैं.. अमीर हसन आमिर को दुनिया भर में लोग जानते हैं.. वहीं हिंदुस्तान के पहले नौहेख्वान है जिन्हें तकरीबन 30 सालों से भी ज्यादा से सुना जा रहा है.. जिनके यूट्यूब, फेसबुक सोशल मीडिया पर लाखों में फैन फॉलोविंग हैं.. वहीं गौर करने वाली बात ये है कि अमीर हसन आमिर सिर्फ उन सौगवारों के ही लिए नौहा नहीं पढ़ते जो सुन बोल पाते हैं.. बल्कि उन लोगों के लिए भी नौहे की वीडियो बनाते है जो बोल सुन नहीं पाते.. जिन्हें साइन भाषा के ज़रिये नौहा समझाया जाता है.. 

वहीं इस प्रोग्राम में तकरीबन 5 हज़ार से ज्यादा लोग शामिल होते हैं.. जिसमें हर धर्म के लोग इमाम हुसैन अस की शहादत को याद करते हैं..

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