सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक नवाचार से बदल दी तस्वीर
निखिल राज स्टेट मीडिया प्रभारी बिहार / जब कोई काम जुनून के साथ किया जाता है, तब छोटी से छोटी बात को भी बहुत बड़ी समझ कर किया जाता हैं। इससे काम करने में न सिर्फ आनन्द आता है, बल्कि इसके माध्यम से व्यक्ति वह सब हासिल कर सकता हैं, जो बाकी अन्य साधनों से नहीं करता। जी!हां, उक्त बातों को चरितार्थ किया है शिक्षक शिव शंकर गिरि ने।
श्री गिरि अपनी शैक्षणिक जानकारियों के दम पर एक ओर जहां बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफलता का परचम लहराया तो दूसरी ओर शैक्षणिक कुशलता के बल स्कूली बच्चों के दिलों में पैठ बना लिया है।
मालूम हो कि श्री गिरि की प्रथम पदस्थापना बतौर शिक्षक एनपीएस सोनारटोला चैनपुर आदापुर में हुई। उन्होंने मात्र ढाई साल बतौर प्रभारी प्रधान शिक्षक कार्य किया, लेकिन उक्त सीमित अवधि में ही ऐसा कार्य किया किया कि तात्कालीन जिलाधिकारी एस.के.अशोक को उन्हें शिक्षक दिवस के मौके पर सम्मानित करना पड़ा।फिलवक्त वे यूएमएस बीएमसी पीपरा उर्दू छौड़ादानों में कार्यरत हैं। श्री गिरि ने बताया कि उन्होंने बच्चों के अभिभावकों का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है। उक्त ग्रुप में शैक्षणिक कोषांग द्वारा निर्मित चेतना सत्र सामग्री को हर संध्या भेज दी जाती है। बच्चे ग्रुप से नियमित पांच सामान्य ज्ञान, पांच तर्क ज्ञान, पांच अंग्रेजी व हिंदी का शब्द ज्ञान, दिवस ज्ञान आदि को नोटबुक में लिख लेते हैं और आगामी दिवस को विद्यालय की चेतना सत्र में बताते हैं। इससे उन्हें सिलेबस के अतिरिक्त अन्य जानकारियां भी हासिल हो जाती है। मालूम हो कि वे विद्यालय के पोषक क्षेत्र में जाकर बच्चों को स्कूल यूनिफार्म,चप्पल, स्टेशनरी आदि के साथ स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों से अपील करते हैं। नाखून साफ कर एवं नहला-धोकर बच्चों को स्कूल भेजने का अनुरोध करते हैं।
बता दें कि जब जिले के शैक्षणिक कोषांग से चेतना सत्र सामग्री का प्रसारण बंद हो गया तब कुछ शिक्षक मित्रों के सहयोग से श्री गिरि खुद का शैक्षणिक कोषांग गठित कर चेतना सत्र सामग्री का नियमित निर्माण एवं प्रसारण कर रहे है।

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