बेलगाम अफसरशाही भारी भ्रष्टाचार में भूमाफिया दबंगों से गरीबों को अपनी पैतृक भूमि बचाना हो रहा मुश्किल
हैदरगढ़ में डीएम-एसडीएम-सीओ से शिकायत बावजूद फर्जीवाड़ा कर पीड़ित की भूमि बेच रहे दबंग
-रामनगर में दलित-गरीब की जमीन पर जबरन कब्जा कर दबंग करा रहे पक्का निर्माण, शिकायत सिफर
संवाददाता मोहम्मद सद्दाम बाराबंकी । गरीब दलित की जमीन पर दबंग जबरन कब्जा कर पक्का निर्माण करा रहे है दलित गरीब के विरोध पर दबंगों ने बुरी तरह मारापीटा। जिसकी शिकायत पर तमाम कागजात बावजूद रामनगर तहसील प्रशासन व मुकामी पुलिस ने ना तो सुनवाई की और ना ही रोक लगाई, और तो और मारने पीटने जान से मारने की धमकी, जाति सूचक गाली गलौच पर भी क्यों दबंगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया? इस सवाल का जवाब किसी जिम्मेदार के पास नहीं है। इसके बाद कहे की रामराज्य आने वाला है तो शायद घोर कलियुग में राम के नाम का अर्थ भी अनर्थ का प्रयायी भ्रष्टाचारी तंत्र ने बना दिया है। मामला थाना व तहसील रामनगर क्षेत्रान्तर्गत ग्राम तहापुर मजरे तिलौटा से जुड़ा है। जहां के निवासी सन्तोष कुमार पुत्र रामसेवक की गाटा संख्या 393 अंतर्गत रकबा 0.0190 हैक्टेयर संक्रमणीय पुश्तैनी भूमि है। जिसपर ग्राम तिलौटा निवासी दबंगों की गिद्ध दृष्टि पड़ी तो दलित संतोष की खराब आर्थिक स्थिति जानसमझ कर विरोध ना कर पाने की स्थिति भांप उसकी जमीन पर जबरन कब्जा करते हुए पक्का निर्माण कराने लगे। जब संतोष व परिवारीजनों को जानकारी हुई तो उन्होंने विरोध करते हुए रोकने का प्रयास किया। तो संतोष के बताए अनुसार आधा दर्जन से अधिक लोगों ने बुरी तरह हमला बोलते हुए मारा पीटा, जाति सूचक गंदी-गंदी गालियां देते हुृए जान से मारने की धमकी दी। किसी तरह जान बचाकर पीड़ित परिवार ने मुकामी पुलिस से न्याय व सुरक्षा की गुहार लगाई। लेकिन कोई सुनवाई पीड़ित अनुसार ना होने पर जिला मुख्यालय पहुँच कर एसपी को शिकायतीपत्र देते हुए जमीन कर अवैध कब्जा हटवाकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं हैदरगढ़ वाले मामले में दो-दो बार डीएम शशांक त्रिपाठी से व 23 जून सोमवार को एसपी अर्पित विजय वर्गीय से भेटकर हैदरगढ़ नगर पंचायत क्षेत्रान्तर्गत गाटा संखया 970 की उनके हिस्से की पुश्तैनी जमीन की दबंगों से सुरक्षा की मांग करते हुए बताया कि एक वर्ष से दबंग आपराधिक प्रवृत्ति के भूमाफियाओं से जारी विवाद में आधी भूमि पट्टेदारों से क्रयकर पूरी जमीन पर ना सिर्फ कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। बल्कि पीड़ित अब्दुल मुईन पुत्र अब्दुल मुईद के हिस्से की जमीन से जबरन रास्ता निकालने का षणयंत्र नगर पंचायत प्रशासन से मिलीभगत कर किया जा रहा है। जिसमें बह रही भ्रष्टाचार की गंगा में यह हाल पीड़ित अनुसार है कि डीएम ने बिना लेआउट स्वीकृत प्लाटिंग को ध्वस्त करने की कार्रवाई पर अमल तो एक तरफ 12 जून को डीएम द्वारा एसडीएम हैदरगढ़ को निर्देश बावजूद गाटा संखया 970 में पीड़ित के हिस्से वाली भूमि से दो-दो रजिस्ट्री भूमाफियाओं ने कर दी जबकि पीड़ित अनुसार भूमि उसके हिस्से वाली पैतृक सम्पत्ति है। लेकिन स्थानीय प्रशासन की भूमाफियाओं से मिलीभगत का आलम यह है कि 12 जून को डीएम के निर्देश बावजूद पीड़ित के भूमि की पैमाईश कर हदबंदी के लिए जिन राजस्व अधिकारियों कर्मचारियों के पास समय तक नहीं है वो 24 जून को भूमाफियाओं की इसी जमीन से मिली अवैध प्लाटिंग की पैमाईश करने पहुंचे और निशान भी लगवाए। जबकि ना तो लेआउट स्वीकृत है और ना ही अन्य कोई स्वीकृति वैधानिक रूप से है। यहां तक बेलगामी व जंगलराज सामने आया कि 13 जून को दो रजिस्ट्री के बाद 2-3 अन्य रजिस्ट्री पीड़ित के गाटा संखया की उसके हिस्से की भूमि से कर दी गई। जिससे यह आसानी से समझा जा सकता है कि प्रशासन लोगों को न्याय सुरक्षा व सरक्षंण दे रहा कि भूमाफियाओं-दबंगों-जरायम पेशाओं की मदद के मस्त है। अब ये मस्ती बिना किसी बड़ी तरावट के तो संभव नहीं है। तो ग्रामीणों के जेहन मे एक अन्य सवाल घुमड़ रहा है कि क्या तरावट जिला प्रशासन तक पहुंच रही है जो पीड़ितों-पत्रकारों के सीयूजी पर कॉल करने बावजूद ना तो माननीय बात कर रहे और ना ही आश्वासन बावजूद पीड़ितों को न्याय ही मिल पा रहा है। अब बड़ा सवाल यह भी है कि कहीं इसके पीछे राजनीतिक पार्टी के बड़े नेता जो इमानदार होने का तमगा सामने लगाकर चलते हैं, कहीं उन्हीं का संरक्षण तो दबंगों को नहीं है कि पार्टी भले बदनाम हो जाए लेकिन उनके वसूली भाईयों भूमाफियाओं पर कोई कार्यवाही नहीं होनी चाहिए। फिर चाहे अमरदीप गुप्ता की हत्या का मामला हो या फिर अब्दुल मुईन की जमीन सहित तमाम ऐसे जो जान है तो जहान है को मान चुपचाप बैठ अपनी संपत्ति जाना किस्मत का खेल मान लिए। लेकिन लोग ये तो कहेंगे ही कि अगर ये रामराज्य है तो रावणराज्य ही ठीक था।
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