संतुलित पोषण दे मिट्टी को, बढ़ेगी फसल की क्षमता : डॉ. मांधाता सिंह।
रामपुर कारखाना, देवरिया - कृषि विज्ञान केंद्र (भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी), मल्हना, देवरिया एवं कृषि विभाग देवरिया के संयुक्त तत्वावधान में विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत दिनांक 9 जून 2025 को कार्यक्रम का ग्यारहवां दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह आयोजन विकासखंड रामपुर कारखाना के महरौना, प्राणपुर, गोरकाठी, कुशारि, पांडेयपुर, लंगड़ा, .किशुनपाली, बिशुनपुर कला एवं महुआपाठन गांवों में किया गया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. मांधाता सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र देवरिया ने कहा कि "जैसे इंसान को स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार की आवश्यकता होती है, वैसे ही मिट्टी को भी संतुलित पोषण देना जरूरी है। यदि हम जैविक व प्राकृतिक संसाधनों से मिट्टी की पोषकता बनाए रखें, तो फसल उत्पादन में निरंतरता और गुणवत्ता दोनों बनी रहती हैं।" उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खादों का प्रयोग करें। डॉ. रजनीश श्रीवास्तव, वैज्ञानिक (उद्यान), ने कहा कि "सब्जी उत्पादन में मिट्टी परीक्षण और जैविक उर्वरकों के प्रयोग से लागत घटती है और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है।" उन्होंने फसल चक्र और पौध संरक्षण उपायों पर भी चर्चा की। डॉ. कमलेश मीना, वैज्ञानिक (सस्य विज्ञान), ने कहा कि "विविध फसलीकरण और हरी खाद जैसी पद्धतियां अपनाकर हम मृदा की उर्वरता लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं।" उन्होंने किसानों को घरेलू स्तर पर जैविक घोल तैयार करने की विधियां भी समझाईं। श्री जय कुमार, वैज्ञानिक (गृह विज्ञान), ने बताया कि "गांव की महिलाएं स्थानीय संसाधनों से अचार, पापड़, जैविक खाद आदि बनाकर स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ा सकती हैं। इससे परिवार की आय बढ़ती है और आत्मनिर्भरता आती है।" डॉ. अंकुर शर्मा, वैज्ञानिक (पशु जैव प्रौद्योगिकी), ने कहा कि "पशुपालन केवल दुग्ध उत्पादन तक सीमित नहीं है, यह खेती के लिए जैविक इनपुट का भी एक विश्वसनीय स्रोत है।" उन्होंने गोबर, मूत्र व अन्य अपशिष्ट के वैज्ञानिक उपयोग पर जोर दिया। सुश्री इरम, पौध संरक्षण अधिकारी, कृषि विभाग देवरिया ने कहा कि "कीट प्रबंधन में एकीकृत जैविक तकनीकें फसलों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मददगार हैं।" डॉ. पंकज कुमार, पशु चिकित्सक, रामपुर कारखाना ने कहा, "स्वस्थ पशु न केवल दूध और मांस उत्पादन में सहायक होते हैं, बल्कि खेतों की उत्पादकता बढ़ाने वाले जैविक साधनों का भी प्रमुख स्रोत हैं। किसानों को पशुओं के स्वास्थ्य पर नियमित ध्यान देना चाहिए।"
कार्यक्रम में लगभग 1600 किसान शामिल हुए। उन्होंने विभिन्न वैज्ञानिकों से बातचीत कर खेती, पशुपालन एवं उद्यान से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खेती अपनाने हेतु यह अभियान निरंतर जारी है।
UPN न्यूज चैनल बरहज देवरिया जिला ब्यूरो गजानन्द मौर्य

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