विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक का मुख्य मार्ग बना बदहाली की मिसाल! क्या 758वां उर्स भी टूटी सड़क और गड्ढों के बीच होगा शुरू?
रिपोर्ट :- असलम खान हरिद्वार
पिरान कलियर उत्तराखंड सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन विश्व प्रसिद्ध दरगाह हज़रत साबिर पाक की ओर जाने वाले कोर कॉलेज–पिरान कलियर मुख्य मार्ग की हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यह सड़क आज ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी है कि इस पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं। जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी हुई सड़क, जलभराव और टूटी सतह राहगीरों के लिए रोज़ मुसीबत बन चुकी है।
यह वही मार्ग है, जिससे हर दिन हजारों स्थानीय लोग, छात्र, व्यापारी, मरीज और देश-विदेश से आने वाले जायरीन दरगाह तक पहुंचते हैं। लेकिन सड़क की हालत देखकर ऐसा लगता है मानो वर्षों से इसकी ओर किसी जिम्मेदार विभाग ने मुड़कर भी नहीं देखा। बरसात ने हालात और भयावह बना दिए हैं। गड्ढों में भरे पानी के कारण यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां खत्म होती है और गड्ढा कहां शुरू होता है। दोपहिया वाहन चालक हर दिन हादसे का खतरा उठाकर सफर कर रहे हैं, जबकि एंबुलेंस और अन्य वाहन भी रेंगने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार विभाग किसका इंतजार कर रहा है?
क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही फाइलें खुलेंगी? क्या लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा की कोई अहमियत नहीं है? विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल तक जाने वाले मुख्य मार्ग की यह बदहाली न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि पूरे जनपद की छवि को भी प्रभावित करती है।
हैरानी की बात यह है कि अब से लगभग 5 दिन बाद महंदी डोरी की रस्म के बाद दरगाह हज़रत साबिर पाक के 758 वें सालाना उर्स का आगाज़ होने जा रहा है। उर्स में लाखों जायरीन देश और विदेश से पिरान कलियर पहुंचेंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विश्व प्रसिद्ध साबिर पाक का 758वां उर्स भी इसी टूटी-फूटी, गड्ढों से भरी और बदहाल सड़क के सहारे शुरू होगा?यदि उर्स से पहले भी इस मार्ग की मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं होता, तो यह संबंधित विभागों की तैयारी और प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष उर्स से पहले विकास और व्यवस्थाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन इस सबसे महत्वपूर्ण मार्ग की हालत खुद उन दावों की पोल खोल रही है। यदि लाखों जायरीन इसी रास्ते से गुजरेंगे तो उन्हें सबसे पहले बदहाल सड़क का सामना करना पड़ेगा।
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